सुपीरियर सेमीसर्कुलर कनाल डिहिसेंस (SSCD) एक दुर्लभ अंदर के कान की कंडीशन है जो वेस्टिबुलर और सुनने की शक्ति से जुड़ी सिमटम की ओर ले जाती है। यह लेबिरिंथ के हड्डी के हिस्से का न होना या पतला होने के कारण होता है जो सुपीरियर सेमीसर्कुलर कनाल के ऊपर स्थित होता है।
सिमटम
वर्टिगो और ऑसिलोप्सिया: यह तेज आवाज और ऐसी ऐक्टिविटीज़ से ट्रिगर होता है जो इंट्राक्रैनीयल या कान के बीच के हिस्से के दबाव को बदल देती हैं, जैसे कि तनाव, छींकना या खांसना।
ऑटोफोनी: अपनी खुद की आवाज तेज होना, ऐम्प्लफाइ होना।
शोर के प्रति बहुत ज़्यादा सेंसीटिविटी: आवाज के प्रति सेंसीटिविटी का बढ़ जाना।
कंडक्टिव हियरिंग लॉस: ऑडियोमेट्री के दौरान पता चलता है।
ऑसिलोप्सिया: आंखों या होराईजन के हिलने का एहसास, विशेष रूप से ऊपर के प्लेन में।
अतिरिक्त सिमटम
अपनी आंखों को हिलते हुए सुनना
दौड़ने जैसी ऐक्टिविटीज़ के दौरान प्रभावित कान में आवाज के बिगड़ने का एहसास
हड्डी द्वारा कंडक्ट की गई आवाज डिहिसेंस के असर को बढ़ाती है
हवा द्वारा कोक्लीअ को ट्रांसमिट की गई आवाजें डिहिसेंस द्वारा कम हो जाती हैं
डायग्नोसिस
वीडियोनिस्टाग्मोग्राफी:
वेस्टिबुलर ईवैल्यूऐशन, जो वाल्सल्वा मन्यूवर और वाईब्रेशन टेस्ट के दौरान VNG पर निस्टागमस दिखा सकता है।
ऑडियोमेट्री
ऑडियोमेट्री में कंडक्टिव हियरिंग लॉस का पता चलता है।
वेस्टिबुलर इवोक्ड मायोजेनिक पोटेंशियल (VEMP):
तेज़ आवाज़ें इप्सिलैटरल स्टर्नोक्लेडोमैस्टॉइड मांसपेशी में शॉर्ट-लेटेंसी रीलैक्सैशन पोटेनशियल को बढ़ाती हैं।
VEMP का रेस्पोंस सामान्य सीमा से नीचे होगा, और जिस कान में असर हुआ है उसमें एक समान स्टिमुली वाली तीव्रता के लिए VEMP तरंग का विस्तार बड़ा होगा।
सीटी इमेजिंग:
टेम्पोरल हड्डियों का हाई -रिज़ॉल्यूशन सीटी स्कैन सूपिरीअर कनाल को कवर करने वाली हड्डी में दरार को दिखा सकता है। जिस हड्डी पर चोट नहीं लगी है उसकी पतली परत को अनदेखा करने से बचने के लिए सावधानीपूर्वक अनालीसिस करने की जरूरत होती है।
इस अप्रोच में नरम फाइबर युक्त टिशू और हड्डी के पैटी के साथ सूपिरीअर कनाल को बंद करना शामिल है, जिससे फासिया को जगह पर रखा जा सके। यह वेस्टिबुलर और सुनने से जुड़ी, दोनों सिमटम से लंबे समय तक राहत प्रदान करता है। हालाँकि ऑपरेशन की गई कनाल की काम करने की क्षमता कम हो सकती है, लेकिन दूसरे सेमीसर्कुलर कनाल सामान्य रूप से काम करती हैं, जिससे मरीज के समग्र संतुलन पर बहुत कम असर पड़ता है।
SSCD को मैनेज करना:
ट्रिगर से बचना: कुछ मरीजों को तेज आवाज जैसे ट्रिगर से बचकर राहत मिलती है।
सर्जरी: लगातार बने रहने वाला असंतुलन, ऑटोफोनी यानि खुद की आवाज कानों में गूँजती है, बहुत तेज आवाज को बर्दाश्त नहीं कर सकते, और पल्सटाइल ऑसिलोप्सिया जिसमें ऐसा लगता है कि आपकी आस-पास की चीजें उछल रही हैं, हिल रही हैं, इस तरह के गंभीर सिमटम के लिए, सर्जरी जरूरी हो सकती है।
SSCD के मूल कारण पर गौर करके, मरीज अपने जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार कर सकते हैं और इस स्थिति से जुड़े परेशान करने वाले सिमटम को कम कर सकते हैं।
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